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सोनाली फौगाट की मौत में मुंबई कनैकशन, भाजपा नेताओं ने बनाई सोनाली फौगाट के परिजनों से दूरी !

परिजनों का आरोप सुधीर के जाल में पूरी तरह से फंस चुकी थी सोनाली, परिजनों से रहती थी अलग थलग




हिसार : सुनील कोहाड़ / तहलका न्यूज



सोनाली फौगाट टीक टॉक व बिग बॉस के साथ साथ राजनीति में काफी सक्रिय भूमिका निभा रही थी। वो आदमपुर हलके से विधानसभा चुनाव हारने के बाद भीे लोगों की आवाज को बुलंद रही थी। लेकिन वो कुछ समय से परिजनों से अलग थलग से रहने लगी थी। 






सोनाली की जेठानी अंजना व बहन रेमन ने बताया कि 2019 के विधानसभा चुनाव के प्रचार में सुधीर सांगवान एक कार्यकर्ता के रूप आया था और वो धीरे धीरे सोनाली पर डोरे डालने लगा और उसको घर वालों के प्रति नफरत पैदा करने में कामयाब हो गया। जिसके कारण घर में कई बार झगड़ा भी होता था। सुधीर अपने मंशूबों में कामयाब हो गया और उसका पीए बन गया। जिसके बाद सोनाली पूरी तरह से सुधीर के जाल में फंस चुकी थी। जैसा सुधीर कहता था वो वैसा ही करती थी। यहां तक की सुधीर ने सोनाली के घर की तरफ से फार्म हाऊस की तरफ जाने वाले रास्ते को भी बंद करवा दिया था। इस तरह से सोनाली घर परिवार व रिश्तेदारों से पूरी तरह से अलग हो गई थी। 




सकी जेठानी अंजना ने कई आरोप लगाते हुए कहा कि घटना वाले दिन शाम को सोनाली के मोबाइल फोन पर कॉल की थी, तो फोन उनके पीए सुधीर ने उठाया। सुधीर ने कहा कि मैं अभी उठा हूं और हम मुंबई में हैं। उस समय मुझे पता चला कि सोनाली मुंबई में है। सुबह कई बार सुधीर को फोन किया, लेकिन सुधीर ने फोन नहीं उठाया। जब फोन उठाया तो उसने कहा कि रात को शूटिंग के चलते मुंबई से गोवा आ गए थे। अंजना ने कहा  कि गोवा पुलिस जांच करे तो सामने आ जाएगा कि वे मुंबई गए थे या नहीं।





सोनाली के भाई वतन ढाका ने बताया कि गोवा में उसका भाई रींकू व अन्य परिजन गए हुए हैं और उन्होंने बताया है कि सोनाली का चेहरा नीला पड़ गया है। वो गोवा पुलिस की कार्यवाही से संतुष्ट नहीं हैं और वो सोनाली का पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स में करवाने के लिए सरकार से अपील करते हैं, साथ ही इसकी जांच सीबीआई से करवाने की गुहार लगा रहे हैं। 






सोनाली फौगाट अकसर कार्यकर्ताओं से घिरी हुई रहती थी ओर वो भाजपा के बड़े नेताओं के संपर्क में भी रहती थी। लेकिन उसकी मौत के बाद भाजपा नेताओं ने मानों परिवार से दूरी बना ली हो। शिक्षा मंत्री कंवर पाल गुर्जर के अलावा कोई उनके पास नहीं आया। दूसरे दिन भी कुछ चुनिंदा कार्यकर्ता ही फार्म हाऊस पर पहुंचे। लेकिन कोई बड़ा नेता ना ही तो फार्म हाऊस पर आया और ना ही किसी बड़े नेता द्वारा फोन पर परिवार की इस दुख की घड़ी में सांत्वना दी। 


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