पहाड़ दरकने और मिर्चपुर कांड के बीच क्या कनैक्शन ?
मिर्चपुर कांड और डेडम खनन कनैक्शन
हिसार - सुनील कोहाड़ / तहलका न्यूज
मिर्चपुर कांड को हुए 12 साल होने वाले हैं। लेकिन इसकी आहट समय समय पर सुनवाई देती रही हैं। जिसकी वजह से इसकी यादें फिर से ताजा हो जाती हैं। मिर्चपुर हादसे में एक व्यक्ति शुरू से ही खुब चर्चाओं में रहा। चाहे बाल्मीकि समाज के लोगों के गांव से पलायन करने का रहा हो या फिर गांव से फोर्स उठाने से लेकर हर छोटी-बड़ी खबर में उसका नाम आना लाजमी था। वो नाम था तंवर का। जिसकी वजह से बाल्मीकि समाज के लोग खुश दिखाई देते थे तो जाट समाज के लिए ही नहीं तत्कालीन मुख्यमंत्री हुड्डा के गले का फांस बन गया था।
मिर्चपुर कांड में एक दम से सुर्खियों में आए वेदपाल तंवर ने अपने जीवन में तंगी भी देखी होगी, ये बात किसी के गले नहीं उतरती है। लेकिन ये सच्चाई है। वेदपाल तंवर ने अपनी जिंदगी की शुरुआत एक मेटाडोर से की थी और सवारियां भरकर खुब रोड़ पर दौड़ाया। 5-10 रुपए के लिए दूसरों से कंपीटिशन में मेटाडोर को भगाया भी और सवारियां भरने के लिए खुब आवाजें भी लगाई। उस समय वेदपाल के नाम से कोई नहीं जानता था। क्योंकि उस समय वो बेदू मेटाडोर वाले के नाम से जाना जाता था। उस समय का बेदू कब वेदपाल तंवर बने गया और कब डेडम खनन उसके हाथों में आई। कुछ पता ही नहीं चला। पता जब चला जब सांसद धर्मबीर सिंह का पहाड़ दरकने को लेकर ब्यान सामने आया।
बुरे दिनों में जब उनकी खुद की जेब में पैसे नहीं होते थे तब भी वे दोस्तों को उधार लेकर खिलाने की कुव्वत रखते थे। उनमें से कुछ आज उनके बिजनसे पार्टनर हैं और करोड़ो- अरबों मे खेल रहे हैं। वेदपाल तंवर को ये अच्छे से पता है कारोबार की सीढियां सियायत के सहारे के बिना नहीं चढ़ी जा सकती। इसलिए वो अब पार्टी नहीं वो आदमी तलाशते हैं जिसकी एक कीमत हो। भूपेंद्र सिंह हुड्डा जब वेदपाल तंवर से बहुत तंग आ गए तो किसी के माध्यम से उन्होंने वेदपाल तंवर को बुलाया। वेदपाल तंवर ने कहा कि आप राजा और मैं आपकी प्रजा। एक छोटा मोटा कारोबार भी करता हूं।
तंवर ने कहा कि कारोबार के कुछ नियम कायदे होते हैं। मैंने किसको क्या दिया है ये मैं आपको किसी भी कीमत पर नहीं बताऊंगा, हां, आप मुझसे क्या चाहते हैं ये बताएं और जो मैं आपको दूंगा वो किसी दूसरे को भी भी नहीं बताऊंगा। ये कहकर वो बाहर निकल गया। दोनों के बीच सहमति बन गई कि तूं मेरे बारे में कुछ मत कहना और मैं तुम्हारे बारे में कुछ नहीं करूंगा। परंतु भिवानी महेंद्रगढ से सांसद धर्मवीर सिंह के साथ वेदपाल तंवर का शुरू से ही छत्तीस का आंकड़ा रहा है। भले ही वो उन्हें पब्लिक हेल्थ में डेली वेज नौकर लगाने वाला खुद को बताते रहे हैं उसके बदले में वेदपाल तंवर अपनी सभाओं में धर्मवीर सिंह को भला छोरा कहते रहे हैं।
मिर्चपुर के कुछ बाल्मीकि परिवार आज उनकी गोवर्धन माइंस में नौकरी करते हैं। उन परिवाराें की कई बेटियों की शादी वेदपाल तंवर ने करवाई हैं और आज भी बहुत सारे लोग उनके ही फार्म हाऊस में रहते हैं।
अजय चौटाला के साथ अच्छी दोस्ती
वेदपाल तंवर ने अपने एक साथी पाले राम के साथ अजय चौटाला के साथ अच्छी दोस्ती गांठ ली। ये दोस्ती पहाड़ जैसी परवान चढी और देखते ही देखते खानक का पहाड़ वेदपाल तंवर की मुट्ठी में आ गया। खानक में मजदूरों ने एक बड़ा आंदोलन किया लेकिन चौटाला सरकार ने उसे बदर्दी से दबा दिया। बेदू अब वेदपाल ठेकेदार के रूप में विख्यात हो गए। जिन लोगों को रोजगार मिला वो वेदपाल तंवर के मुरीद होते चले गए। लग्जरी गाड़ियां आ गई और फार्महाउस भी बन गए। उसी दौर में हिसार के कैमरी रोड पर वेदपाल तंवर ने एक ऐसा फार्महाउस बनाया जिसकी लग्जरी और खूबसूरती का आज भी हर कोई कायल हो जाता है। इसी फार्महाउस की एक छत्तरी पर रोज सियायत के बड़े खिलाड़ियों की महफिल सजती और हमेशा की तरह मेजबान होते वेदपाल तंवर।
वेदपाल तंवर को खनन की कमाई खूब रास आई। भूपेंद्र सिंह हुड्डा की सरकार आई तो खानक के खनन कारोबार पर दूसरे माफियाओं ने नजर गाड़ दी। पता नहीं क्यों भूपेंद्र सिंह हुड्डा से वेदपाल तंवर की पैठ नहीं बैठ पाई। कांग्रेस की सरकार में वेदपाल तंवर और सरकार में मंत्री किरण चौधरी के खासमखास लोगों में शामिल हो गए। जब भी भूपेंद्र सिंह हुड्डा वेदपाल तंवर पर शिकंजा कसने लगते तो किरण चौधरी ढाल बन जातीं। पहाड़ में खनन पर रोक लगाई तो वेदपाल तंवर कोर्ट में चला गया। इसी बीच कुदरत ने उन्हें उनका बेटा भी लौटा दिया और वेदपाल तंवर उसी जोश के साथ मैदान में आ डटे।
हुड्डा राज में कई केस लगे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से जमानत लेकर आ गया। लेकिन चुप नहीं बैठा, हां चुनावी राजनीति से किनारा जरुर कर लिया। भाजपा की सरकार बनी तो वेदपाल तंवर ने अपने काम करने का तरीका बदल लिया। देखते ही देखते एक बार फिर से खानक और डाडम का पहाड़ वेदपाल तंवर की फिर से मुट्ठी में आ गए। गोवर्धन माइंस बड़ी से बड़ी बनती गई। इसने देश की अन्य खनन में भी किस्मत आजमाई, कई जगह बड़े फार्महाउस और जमीनें भी वेदपाल तंवर ने ली है। गाड़ी का शौक पहले की तरह आज भी बना हुआ है। बस उसमें फर्क ये आया है कि उस समय मेटाडोर का स्टेरिंग खुद संभालता था और आज लग्जरी कारों की खिड़की तक नौकर खोलते हैं। वेशभूषा वही की वही है, सिर पर राजपूतना पगड़ी, धोती और कुर्ता है।

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