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गैस पाइपलाइन के विरोध में किसानों का हल्ला बोल

पांच फीट का मुआवजा दे कंपनी 50 फीट कब्जा रही है जमीन

.     जिला मुख्यालय पर धरना देते किसान।

हिसार / तहलका न्यूज

      हांसी क्षेत्र के अनेक गांवों में इन दिनों पाइपलाइन दबाने का काम किया जा रहा है। जोकि झज्जर से हिसार जाएगी।‌ इसके विरोध में सैकड़ों किसान जिला मुख्यालय पर धरना प्रदर्शन करने पहुंच गए और उन्होंने कंपनी की मनमर्जी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों की समस्या की गंभीरता को देखते हुए जिला उपायुक्त डां. प्रियंका सोनी किसानों के बीच पहुंची और उनकी समस्या सुनी। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि किसानों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। इसकी निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जाएगी। उसके बाद ही किसान शांत हुए और धरना खत्म कर लौटे। किसानों का ये धरना प्रदर्शन पूर्व  जिला पार्षद प्रतिनिधि मनोज राठी व कुलदीप सहरावत ने किया। उन्होंने बताया कि उमरा, सुल्तानपुर, भगाना, ढिंढेरी, पुट्ठी मंगल खां इत्यादि गांव के खेतों में गैस पाइपलाइन परियोजना पर काम किया जा रहा है। 



              हांसी क्षेत्र के गांवों से होकर डाली जा रही झज्जर-हिसार गैस पाइपलाइन के कार्य से खफा किसानों ने बृहस्पतिवार को हिसार जिला मुख्यालय के सामने धरना दिया। किसानों ने गेल इंडिया कंपनी के अधिकारियों व कर्मचारियों पर परेशान करने का आरोप लगाते हुए जोरदार नारेबाजी व प्रदर्शन किया। करीबन तीन घंटे तक जिला मुख्यालय के गेट पर किसानों का प्रदर्शन चलता रहा। उसके बाद उपायुक्त डॉ प्रियंका सोनी ने मौके पर जाकर किसानों की समस्या सुनि। उपायुक्त ने उचित कार्रवाई का भरोसा दिया गया।  



किसानों ने हांसी इलाके के गांव उमरा, भगाना, सुल्तानपुर, ढंढेरी, पुट्ठी मंगल खां से गैस की पाइपलाइन दबाई गई। गुजरात से पंजाब के बठिंडा के लिए ये पाइपलाइन बिछाने काम किया जा रहा है। पाइपलाइन के लिए किसानों की जमीन एक्वायर करने की एवज में मुआवजा दिया जा रहा है। किसानों का आरोप है कि उनको प्रति एकड़ 12 लाख की दर से 5 फीट ही जमीन का ही मुआवजा दिया जा रहा है, जोकि तकरीबन 30 हजार रुपए है, जबकि कलेक्टर रेट के हिसाब 33 लाख एकड़ की दर से यह 90 हजार रुपए होना चाहिए।


किसानों के अनुसार 5 फीट जमीन का नाममात्र मुआवजा देकर 50 फीट जमीन कब्जाई जा रही है। असल में गाइडलाइन में लिखा है कि पाइपलाइन के दोनों और 50 फ़ीट के दायरे में किसान न तो पौधारोपण कर सकता है, न घर बना सकता है। इसके अलावा वहां पर कुछ नहीं कर सकते। ऐसे में कंपनी द्वारा 5 फीट जमीन का मुआवजा दे उनकी 50 फीट जमीन कब्जाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा गांवों में खेत जमीन एक लेवल में नहीं है, टीलों की धरती होने के कारण कहीं ऊंचे तो कहीं नीचे हैं, इसके बावजूद 6 फीट नीचे लाइन दबाई जा रही है। अगर किसी किसान का खेत ऊंचा है और यह पाइप लाइन वहां से गुजरेगी तो किसान 25-30 फीट तक अपनी जमीन को लेवल नहीं कर सकता। 


पाइपलाइन के लिए हरे पेड़ काटे जा रहे हैं, सिंचाई विभाग द्वारा खेतों में सिंचाई करने के लिए नाले बनाए हुए हैं उन्हें तोड़ा जा रहा हैं और उनका कोई मुआवजा भी नहीं दे रहे हैं। इस मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों की टीम भी पाइपलाइन को दबाने के तरीकों को गलत करार दे चुके है।

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