विवादों से है पुराना नाता, पड़ेगा महंत की आत्महत्या से फिर कोथ में सनाटा
गद्दी पर बैठने को लेकर हुए विवाद को शब्दाई नाथ ने दी आक्सीजन, अब तेरा क्या होगा योगी
ग्रामीणों से बातचीत करते पुलिस अधिकारीजींद - नारनौंद / सुनील कोहाड़
पेगा गांव में आसन डेरा के महंत शब्दाई नाथ द्वारा आत्महत्या करने की आंच नारनौंद तक पहुंच गई है। नारनौंद थाने के दो मुलाजिमों के अलावा गद्दी पर बैठने को लेकर सुर्खियों में आए कोथ कलां स्थित दादा काला पीर मठ के महंत शुक्राईनाथ योगी पर आ गिरी है। पेगा गांव के ग्रामीणों ने महंत के शव को गांव के बस स्टैंड पर सड़क पर रखकर हांसी चंडीगढ़ मार्ग पर जाम लगाया हुआ है और इस कंपकंपाती ठंड में ग्रामीण साधु संतो के साथ रात भर सड़क पर बैठे रहे। जिसके कारण पुलिस प्रशासन भी सख्ते में है और दबाव शुक्राईनाथ योगी व दूसरे महंत को गिरफ्तार करने के लिए बनाया गया है। क्योंकि कोथ कलां के महंत शुक्राईनाथ योगी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के रिस्ते जगजाहिर हैं। ऐसे में कोथ कलां का दादा काला पीर मठ का विवाद गद्दी पर बैठने को लेकर करीबन चार साल पहले शुरू हुआ था और अब तक थमने का नाम नहीं ले रहा है।
कोथ कलां डेरे के महंत का राजनीतिक कनैक्शन।गांव कोथ कला के दादा काला पीर डेरे की गद्दी को लेकर विवाद शांत ही हुआ था। तो दूसरे पक्ष के महंत शब्दाई नाथ ने आत्महत्या करके एक बार फिर से कोथ कलां के महंत शुक्राईनाथ योगी को विवाद में ला कर खड़ा दिया। इस विवाद के बाद से डेरे में सन्नाटा पसरा हुआ था।
पिछले चार सालों से कोथ कला गांव का दादा काला पीर मठ सुर्खियों में रहा है। 14 मार्च 2018 को डेरे की गद्दी को लेकर विवाद हो गया था और उस विवाद में डीएसपी सहित काफी पुलिसकर्मी व मीडिया कर्मी भी घायल हुए थे। उसके बाद से ही यह डेरा विवादों में रहने लगा। डेरे के महंत नन्नदाई नाथ का 3 जनवरी 2018 को निधन हो गया था। उसके बाद ही डेरे की गद्दी के लिए काफी साधुओं ने इस पर बैठने के लिए अपने प्रयास शुरू कर दिए थे। 6 जनवरी को नाथ संप्रदाय के साधुओं ने डेरे की कमान योगी शुक्राई नाथ को सौंप दी थी।
लेकिन एक पक्ष के साथ हूं को यह फैसला मंजूर नहीं हुआ तो इसके बाद गांव में 25 फरवरी 2018 को पंचायत हुई थी उसमें भी कोई फैसला नहीं हो पाया था। उसके बाद यह फैसला लिया गया कि 14 मार्च 2018 को दादा काला पीर की याद में जो मेला लगाया जाता है। उसमें नाथ संप्रदाय के सभी साधुओं को बुलाकर फैसला लिया जाएगा। 14 मार्च को नाथ संप्रदाय के साधुओं ने भी शुक्राईनाथ के नाम पर ही मोहर लगा दी। तो उसके बाद विरोध में ग्रामीणों व कुछ साधुओं ने बाहर की गद्दी पर भजनाई बैठा दिया। कुछ देर बाद विवाद शुरू हो गया था।
उसके बाद भजनाईं नाथ सहित काफी साधुओं पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसके बाद भी महंत शुक्राईनाथ पर काफी बार जानलेवा हमले हुए। जिसमें वह बाल-बाल बच गए। कुछ दिन पहले ही महंत योगी शुक्राई नाथ पर हमला करने वाले को पंचायत के बीच में महंत ने माफ कर दिया था। ताकि गांव में भाईचारा कायम रह सके।
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इस डेरे के पास करीबन 220 एकड़ उपजाऊ जमीन है। जिस पर खेती की जाती है। प्रत्येक वर्ष इस जमीन को ठेके पर दे दिया जाता है। जिससे कि लाखों रुपए आमदनी होती है। और वो रुपए डेरे पर खर्च कर दिए जाते है। नाथ संप्रदाय का यह सबसे बड़ा डेरा है। इस डेरे में देश भर से हजारों श्रद्धालु दादा काला पीर के दर्शन करने के लिए पहुंचते हैं और जिस पर लाखों रुपए चढ़ावा के रूप में भी आते हैं।
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महंत योगी शुक्राई नाथ के कार्यक्रम में 14 जनवरी 2018 को राज्यपाल आचार्य देवव्रत, सांसद बालक नाथ, सहित काफी नामी हस्ती आई थी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी काफी करीबी हैं।

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