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चारधाम प्रोजेक्ट पर SC में सुनवाई, NGO ने कहा- सेना ने कभी नहीं मांगी चौड़ी सड़कें

 चारधाम प्रोजेक्ट पर SC  में सुनवाई, NGO ने कहा- सेना ने कभी नहीं मांगी चौड़ी सड़कें

नई दिल्ली : सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि चीन की सीमा तक जाने वाले चार धाम हाईवे प्रोजेक्ट में दिक्कतों के चलते सेना को चौड़ी सड़कों की जरूरत है. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति विक्रम नर की पीठ एनजीओ सिटीजन फॉर ग्रीन दून द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई किया.

रक्षा मंत्रालय ने पहले के एक आदेश को वापस लेने के लिए एक आवेदन दायर किया है, जिसमें अदालत ने कहा था कि चौड़ाई 5.5 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए. एनजीओ की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने कहा कि सेना ने कभी नहीं कहा कि हमें ये चौड़ी सड़कें चाहिए.
 राजनीतिक सत्ता में किसी उच्च व्यक्ति ने कहा कि हम चार धाम यात्रा पर राजमार्ग चाहते हैं. सेना अनिच्छा से साथ उनके साथ चली गई.
गौरतलब है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 900 किलोमीटर लंबी चार धाम राजमार्ग परियोजना का उद्देश्य उत्तराखंड के चार शहरों (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ) को हर मौसम में कनेक्टिविटी प्रदान करना है
[6:48 PM, 11/9/2021] +91 90502 78900: हॉकी कोच संदीप सांगवान को द्रोणाचार्य पुरस्कार नहीं मिलने पर HC ने केंद्र से मांगा जवाब

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने हॉकी टीम के कोच संदीप सांगवान को इस साल द्रोणाचार्य अवार्ड नहीं देने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. जस्टिस रेखा पल्ली की बेंच ने 12 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है.

सांगवान ने याचिका दायर कर इस वर्ष रेगुलर कैटेगरी में द्रोणाचार्य पुरस्कार नहीं देने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती दी है. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील राहुल मेहरा ने कहा कि सांगवान हॉकी के मशहूर कोच हैं, लेकिन खेल मंत्रालय ने दो नवंबर को द्रोणाचार्य पुरस्कार पाने वालों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया.
याचिका में कहा गया है कि हॉकी में पुरस्कारों के लिए चार आवेदन दिए गए थे. उनमें सांगवान को सबसे …
[6:48 PM, 11/9/2021] +91 90502 78900: भाजपा विधायकों को अयोग्य घोषित करने के चुनाव आयोग की राय पर बैठे नहीं रह सकते राज्यपाल : न्यायालय

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि ‘लाभ का पद’ मामले में भारतीय जनता पार्टी के 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने के संबंध में निर्वाचन आयोग द्वारा दिए गए विचारों को मणिपुर के राज्यपाल इस तरह दबा नहीं सकते हैं.

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव, न्यायमूर्ति बी. आर. गवई और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न की पीठ को जब बताया गया कि निर्वाचन आयोग से 13 जनवरी, 2021 को मिली राय राज्यपाल ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है, पीठ ने उक्त बात कही.

पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने सलाह दे दी है. राज्यपाल आदेश पारित क्यों नहीं कर सकते हैं? सरकार को राज्यपाल से पूछना चाहिए. कुछ किया जाना चाहिए. निर्वाचन आयोग इस संबंध में अपनी राय जनवरी में ही दे चुका है. राज्यपाल इस फैसले को यूं दबाकर नहीं बैठ सकते हैं.

शीर्ष अदालत कारोंग से विधायक डी. डी. थाईसी और अन्य द्वारा 12 विधायकों को अयोग्य घोषित करने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही थी. राज्य सरकार के वकील ने सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा कि सालिसीटर जनरल दूसरी पीठ के समक्ष एक अन्य मामले में बहस कर रहे हैं. इस पर न्यायालय ने इसकी सुनवाई 11 नवंबर के लिए स्थगित कर दी.

मणिपुर से भाजपा के 12 विधायकों पर 2018 में ‘लाभ के पद’ मामले में संसदीय सचिव के पद पर आसीन होने की वजह से अयोग्यता की तलवार लटकी है. इस मामले में राज्यपाल ने पिछले साल अक्टूबर में निर्वाचन आयोग की राय मांगी थी.

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