आंदोलन स्थगित की घोषणा भारत सरकार ने की है किसानों ने नहीं - राकेश टिकैत
प्रधानमंत्री भारत के हैं उत्तर कोरिया के नहीं, यहां पर प्रत्येक कार्य सलाह मशवरा से करने की है प्रथा- टिकैत
लखनऊ - भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। हमारे यहां पर प्रत्येक कार्य सलाह मशवरा करके करने की प्रथा है। लेकिन साहस ने तो ये प्रथा ही बदल दी। मानो वो भारत में नहीं उतर कोरिया में राज कर रहे हों। उक्त शब्द किसान नेता राकेश टिकैत ने लखनऊ महापंचायत में किसानों को संबोधित करते हुए कहे।
राकेश टिकैत ने कहा कि लखनऊ में एयरपोर्ट के लिए 11 सौ एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया है। लेकिन किसानों को उसके बदले एक फूटी कौड़ी नहीं दी । बल्क यह कहकर किसानों की आवाज दबा दी गई कि सन 1942 में जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया था। इसका हिसाब होगा और इस बार बरसात के बाद लखनऊ एयरपोर्ट की जमीन पर किसान बुवाई करेंगे। इन पीड़ित किसानों का संघर्ष अवश्य होगा। किसानों से आह्वान किया गया कि 26 नवंबर को गाजीपुर बॉर्डर पहुंचें। ट्रैक्टर संसद की ओर रवाना होंगे। साथ ही 29 तारीख से प्रतिदिन 1000 लोग 60 ट्रैक्टर लेकर उधर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि 29 से 3 तारीख तक संसद में कानून वापस लेकर बरगलाने की कोशिश की जाएगी कि अब उनकी मांगे पूरी हो गईं। लेकिन इस बहकावे में नहीं आना है क्योंकि आगे की जंग अभी जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि जो 17 कानून संसद में लाए जा रहे हैं उन्हें भी मंजूर नहीं होने दिया जाएगा। देश भर में उनका विरोध किया जाएगा। जब तक बैठकर बातचीत के माध्यम से सरकार हर मसले पर बात नहीं करेगी। तब तक किसान वापस अपने घरों को नहीं जाने वाले।
उन्होंने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा पर निशाना साधते हुए कहा कि वह एक चीनी मिल का लखीमपुर खीरी में उद्घाटन करने जा रहे हैं। यदि टेनी ने चीनी मिल का उद्घाटन किया तो किसान सारा गन्ना वहां के डीएम के घर पर डाल देंगे। उन्होंने अपनी मांगे दोहराई कि जब तक किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं होते एमएसपी पर गारंटी कानून नहीं बनता, फसलों का उचित दाम नहीं मिलता ऐसे तमाम मुद्दों पर बातचीत कर हल नहीं होता तब तक कोई समझौता नहीं होगा। अभी तक किसानों गन्ने का बकाया नहीं दिया गया है।
राकेश टिकैत ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए एक रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी थी। जिसमें एमएसपी पर गारंटी कानून बनाने की सिफारिश की थी। आखिर अब उसे क्यों लागू नहीं किया जा किया गया। जबकि सात साल से ज्यादा समय उन्हें प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए बीत गया।
उन्होंंने सरकार से अपना रुख साफ करने को कहा कि सरकार को अपनी बात समझाने में किसानों को एक साल का समय लगा। उन्होंने कहा कि किसानों का एक नहीं बल्कि कई हैं। सीड बिल, एमएसपी गारंटी, दूध पॉलिसी, बिजली बिल पराली जैसे तमाम मुद्दे हैं। जिन मुद्दों पर किसानों का संघर्ष अभी चलेगा।
राकेश टिकैत ने कहा कि ओवैसी और भाजपा का रिश्ता चाचा-भतीजे जैसा है। ओवैसी को सीएए और एनआरसी कानून रद्द करने के लिए टीवी पर बात नहीं करनी चाहिए बल्कि भाजपा से सीधे बात करनी चाहिए। टिकैत ने यह बयान ओवैसी के सीएए-एनआरसी कानून रद्द करने की मांग को लेकर दिया है। टिकैत ने कहा कि यह उत्तर कोरिया नहीं है कि साहब ने एकतरफा निर्णय सुना दिया। न लागू करने से पहले बात की और न वापस लेने से पहले किसानों से मशविरा किया। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां एकतरफा बात नहीं चलेगी। बिना किसानों से बातचीत के काम नहीं चलेगा।

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