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महंगाई की मार, धुंआ रहित रसोई का सपना हुआ चकनाचूर

 महंगाई की मार, धुंआ रहित रसोई का सपना हुआ चकनाचूर


महंगाई ने तोड़ी आम आदमी की कमर, हर रोज जेब हो रही है ढ़ीली, उज्जवला योजना ने भी दम तोड़ा, धुंआ धुंआ हुई रसोई
 

 
जनवरी से अक्तूबर के बीच पेट्रोल के दाम 21 फीसदी और डीजल के दाम 25 फीसदी तक बढ़े
रसोई गैस के दाम में भी इस दौरान 27 फीसदी की वृद्धि हुई
नारनौंद, सुनील कोहाड़
      महंगाई लगातार आसमान छू रही है और सरकार इसको कंट्रोल करने की बजाय बेलगाम करती जा रही है। जिससे घर की रसोई से लेकर यात्रा करना भी दिन प्रतिदिन महंगा होता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्र में तो प्रधानमंत्री मोदी की उज्जवला योजना ने भी दम तोड़ दिया है और महिलाएं भी गैस चूल्हे की बजाय पुराने चूल्हों को संवारकर उन खाना बनाना शुरू कर दिया है। ताकि महंगा गैस सिलेंडर लेने से बच सकें और अपनी रसोई के बजट को बिगाड़ने से बचा सकें।

पेट्रोल -डीजल और गैस के बढ़ते दाम घर से कारोबार तक असर डाल रहे हैं। इस साल जनवरी से अक्तूबर के बीच पेट्रोल के दाम 21 फीसदी और डीजल के दाम 25 फीसदी तक बढ़े हैं। रसोई गैस के दाम में भी इस दौरान 27 फीसदी की वृद्धि हुई। रसोई गैस के बढ़ते दाम से खाने पीने की चीजें महंगी हुईं और रसोई का बजट बिगड़ा तो पेट्रोल-डीजल के कीमतों में उछाल आने से किराये पर असर पड़ा। इन सबका असर प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आम आदमी की जेब पर पड़ा है।
     प्रमुख समाजसेवी एवं पूर्व विधायक प्रो. रामभक्त, दिलबाग ढ़ांडा,संदीप काजल, रमेश श्योराण, अमित सिवाच बलवान इत्यादि ने बताया कि सन् 2014 के आम चुनाव से पहले भाजपा नेता आए दिन महंगाई कम करने को लेकर कांग्रेस सरकार को घेरने की जुगत में लगे रहते थे और नरेंद्र मोदी सरकार बनने पर लोगों को इस महंगाई से राहत देने की बातें करते थे। लेकिन नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही भाजपा सरकार ने महंगाई पर काबू पाने की बजाय पेट्रोल डीजल से सरकार का नियंत्रण हटा लिया और इनके माध्यम से टेक्स बटोरने लगी। जिससे आम आदमी की जेब पर कब डाका डाला किसी को कानों-कान खबर नहीं होने दी। वहीं गरीब लोगों को उज्जवला योजना के नाम पर फ्री में गैस सिलेंडर लेकर उनको लाचार बनाने का घिनौना काम मोदी सरकार ने किया है। क्योंकि सरकार ने एक बार तो सिलेंडर फ्री में दे दिया और उसके बाद 250-300 रुपए में मिलने वाले गैस सिलेंडर के दाम 900 से 950 रुपए वसूलने का काम इस सरकार ने किया है। जोकि इतना खर्च तो गरीब आदमी करने के लिए सौ बार सोचेगा।
महंगाई कम नहीं हुई तो त्योहार रह सकते हैं फीके
     अगर महंगाई इसी तरह से लोगों का बजट बिगाड़ती रही तो आने वाले त्योहारों का रंग फीका रहता दिखाई दे रहा है। क्योंकि इस महंगाई के दौर में लोगों को अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करने में ही पसीने छूट रहे हैं तो वो त्योहार पर अधिक खर्च को वहन करने में असमर्थ होंगे।
ये बोली गृहणी-
गृहणी सुदेश, रीना, कमलेश, अनीता, कांता, बाला, प्रोमिला, रेखा,  कहना है कि सीमित बजट में महंगाई का सामना करने के लिए लोग खर्च में कटौती कर रहे हैं। कहा कि घर चलाने के लिए रसोई में जरूरी सामान को छोड़कर कटौती की जा रही है। सरकार को महंगाई पर अंकुश लगाना चाहिए। सरोज ने कहा है कि महंगाई से हर वर्ग परेशान है। हर चीजों पर दाम बढ़ने से घर चलाना मुश्किल हो रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। किसी तरह मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण किया जा रहा है। गैस का दाम बढ़ने से लकड़ी, कंडा के सहारे खाना पकाया जा रहा है। गैस का दाम लगातार बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ गया है। सरकार को रसोई गैस के दाम पर सख्ती से नियंत्रण करने के लिए कदम उठाना चाहिए।
आमजन बोले, सोच समझकर कर रहे खर्च
दिनेश, अमरजीत, विकास, संदीप, मोनू, सुनील दलाल इत्यादि ने बताया कि सोच समझकर घरों से बाहर बाइक व कार निकालते है। जरूरी काम आने पर ही वाहनों का इस्तेमाल कर रहे है। बताया कि पहले पेट्रोल व डीजल के दाम कम थे, तो कहीं पर भी वाहन लेकर चल पड़ते थे, लेकिन अब कई बार सोचना पड़ता है। यहां तक की घर से दूर स्थित सब्जी मंडियों में पैदल ही सब्जियां खरीदने जा रहे है। महीने में इससे दो से तीन हजार की बचत भी हो जाती है।
मुकेश व सत्यवान ने कहा कि महंगाई के इस दौर में इनकम कम हो गई है और खर्च बढ़ गया है। आए दिन पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ने से पूरे घर का बजट बिगड़ने लगा है। सोच-समझकर एक-एक रुपये खर्च करना पड़ रहा है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। लेकिन सरकार आम जन को राहत देने की बजाय पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाले कानून बनाने व देश की संपत्ति को नीलाम करने में लगी हुई है। 
महंगाई दिखा रही अप्रत्यक्ष असर
ब्रेड-बिस्कुट, नमकीन आदि खाद्य वस्तुओं के दाम फिलहाल प्रत्यक्ष रूप से नहीं बढ़े हैं लेकिन इनकी मात्रा और वजन में दस से बीस फीसदी की कमी की गई है। यानी पैक्ड खाद्य वस्तुएं अप्रत्यक्ष रूप से दस से बीस फीसदी महंगी हुई हैं। बीस रुपये में मिलने वाला ब्रेड पहले 280 ग्राम का आता था। जोकि अब यह पैकेट 250 ग्राम का हो गया है। दस रुपये वाले ब्रेड का वजन डेढ़ सौ ग्राम होता था। अब वह भी सवा सौ ग्राम का कर दिया गया है। दस रुपये में पचास ग्राम नमकीन वाले पैकेट में अब 45 ग्राम ही नमकीन मिल रही है। यही हाल बिस्कुट का है। पांच रुपये वाले बिस्कुट के पैकेट में वजन पांच से आठ ग्राम कम किया गया है।
 

 
 समोसा-कचौड़ी, मिठाई भी हुईं महंगी
महंगाई का असर नाश्ते की दुकानों पर भी दिखाई दे रहा है। हलवाइयों ने समोसे के दाम भी पांच से दस रुपए बढ़ा दिए हैं। बेसन से बनी मिठाई के दाम भी 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़े हैं। तो दूध से निर्मित मिठाई के दाम भी पचास से साठ रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ाए गए हैं। मेवा आधारित मिठाइयों के दाम में तो और भी ज्यादा आग लगी है। 



 

 

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