समालखा में टीचर की हैवानियत: मासूम छात्रा की आंख को टीचर ने फोड़ा, गुस्से में आकर टीचर ने छात्रा को मारी नोटबुक, खून बहने लगा तो भेज दिया घर
Teacher burst the eye of an innocent student in Samalkha, anger the teacher hit the student with notebook
समालखा के एक स्कूल में पढ़ाने वाली टीचर से ट्यूशन पढ़ने गई थी छात्रा
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| पांच साल की मासूम बच्ची प्रीति की आंख पर पट्टी बंधी हुई। |
हरियाणा न्यूज टूडे/पानीपत: हरियाणा के पानीपत के समालखा से एक टीचर की मासूम बच्ची से हैवानियत से मारपीट करने का मामला सामने आया है जहां पर एक अध्यापिका ने मासूम छात्रा पर गुस्सा करते हुए उसकी आंख फोड़ दी। दरअसल अध्यापिका ने छात्रा के चेहरे पर नोटबुक मारी थी और वो उसकी आंख में लग गई। मासूम छात्रा के लिए आपको स्थानीय डॉक्टरों सहित रोहतक की जय और दिल्ली एम्स के डॉक्टर भी नहीं बचा पाए। एक महीना भी जाने के बाद पुलिस ने आरोपित महिला टीचर के खिलाफ मामला दर्ज कर जान शुरू कर दी है।
पानीपत के समालखा गांधी कॉलोनी निवासी रामदीन ने बताया कि उसकी 5 साल की पोटली प्रीति का दाखिला मार्च में पास के ही एक स्कूल में करवाया था। इस स्कूल में प्रवीण नाम की महिला टीचर भी पढ़ा रही है और स्कूल में दाखिला लेने वाले बच्चों को कहा जाता है कि स्कूल की छुट्टी होने के बाद ट्यूशन पढ़ने के लिए उसके पास आना होगा। इसी महिला टीचर के पास 5 वर्षीय प्रीति की बड़ी बहन भी ट्यूशन पढ़ने के लिए जाती है।
रामदीन ने आरोप लगाते हुए बताया कि 5 अप्रैल को प्रीति और उसकी बहन जब ट्यूशन पढ़ने के लिए गई हुई थी तो उनकी टीचर प्रवीण ने गुस्से में आकर प्रीति की आंख में नोटबुक मार दी जिसकी वजह से आंख से खून बहने लगा। आंख से खून निकलता देख टीचर ने पहले तो अपने घर पर ही पानी से आंख को साफ करने का प्रयास किया। लेकिन काफी कोशिशें के बाद भी आंख से बह रहा खून नहीं थमा तो उसने प्रीति को घर भेज दिया। जब प्रीति घर पहुंची तो वह दर्द के मारे चिल्ला रही थी। घर आने के बाद प्रीति और उसकी बहन ने ट्यूशन पर घाटी सारी घटना के बारे में परिजनों को अवगत करवाया और परिजन प्रीति को उपचार के लिए स्थानीय डॉक्टरों के पास ले गए। जहां पर डॉक्टरों ने आंख में इंफेक्शन होने की बात कहीं और इसका इलाज रोहतक पीजीआई में करवाने की सलाह दी।
रामदीन के मुताबिक रोहतक पीजीआई में काफी दिन इलाज चलने के बाद भी जब आंख में कोई आराम नहीं हुआ और डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया की आंख नहीं बच सकती तो वह प्रीति को उपचार के लिए दिल्ली एम्स में ले गए। वहां पर भी डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि इस आपको नहीं बता जा सकता क्योंकि अब इस आंख से दिखना भी बिल्कुल बंद हो चुका है। उन्होंने इसकी शिकायत समालखा पुलिस थाने में की तो पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
इस संबंध में समालखा पुलिस के जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर सुरेंद्र ने बताया कि टीचर द्वारा 5 साल की छात्रा की आंख में नोटबुक मर कर आंख फोड़ने की शिकायत मिली थी पुलिस ने 23 मई को मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। चुनाव में ड्यूटी लगी होने के वजह से अभी जांच धीमी चल रही है लेकिन जैसे ही चुनाव से ड्यूटी खत्म होगी तो इस मामले में ठोस कार्रवाई की जाएगी।
आपको बता दें कि शहरों में भले ही बड़ी-बड़ी बिल्डिंग है खड़ी कर शिक्षा देने के नाम पर बच्चों के अभिभावकों से मोटी फीस वसूल की जाती है। लेकिन शहरों के बच्चों को देखने से ऐसा लगता है कि स्कूल में केवल फीस के लिए ही उन्हें बुलाया जाता है और उनके कक्ष से संबंधित पाठ्यक्रम की पढ़ाई नामात्र ही करवाई जाती है। स्कूल की छुट्टी होने के तुरंत बाद बच्चे घर पहुंचते हैं और अपने स्कूल यूनिफॉर्म बदलकर ट्यूशन के लिए निकल लेते हैं। अगर स्कूल में पाठ्यक्रम की पढ़ाई भी नहीं करवाई जाती तो ऐसे स्कूलों में अपने बच्चों को दाखिला दिलवाकर उनके भविष्य के साथ अभिभावक बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि निजी स्कूलों में अध्यापक कितने पढ़े-लिखे नहीं होते इसलिए वह अपने बच्चों का ट्यूशन लगवाते हैं। लेकिन जो बच्चा और अध्यापक स्कूल टाइम में भी पूरा पाठ्यक्रम 1 साल में नहीं करवा सकते वह ट्यूशन पर छात्र मात्र एक या दो घंटे में कैसे पूरा कर लेगा। सरकार को चाहिए कि पहले से 12वीं कक्षा तक चलने वाले ट्यूशन सेंटर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें बंद करना चाहिए ताकि मासूम बच्चों के ऊपर मानसिक दबाव न पड़े से उनका मानसिक ही नहीं शारीरिक रूप से विकास भी थम जाता है और इसके चक्कर में काफी छात्र अपनी जान तक गवा देते हैं।
कुछ छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उनके स्कूलों में जो अध्यापक हैं वह स्कूल में तो केवल होमवर्क देते हैं और अगले दिन होमवर्क को चेक कर लेते हैं। लेकिन उस होमवर्क से रिलेटिव कुछ भी स्कूल में सिखाया नहीं जाता पढ़ा नहीं जाता बल्कि इसके लिए ट्यूशन के लिए उन पर दबाव बनाया जाता है। ताकि घर पर ट्यूशन पढ़ने के लिए बच्चे उनके पास आए और उनकी आमदनी बढ़ सके। क्योंकि अधिकतर निधि स्कूलों में अध्यापकों को कम वेतन मिलता है जिससे महंगाई के दौर में उनके हाई क्वालिटी के खर्च निकालना मुश्किल हो जाता है और ट्यूशन पढ़कर वह अच्छी खासी रकम कमा लेते हैं।
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