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JJP MLA रामकुमार गौतम का फिर छलका दर्द | डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कसा तंज |

Haryana news JJP MLA Ramkumar Gautam again in pain, Deputy CM Dushyant Chautala taunted


गौतम और पार्टी के मतभेद से पिछड़ा नारनौंद 


तहलका न्यूज हिसार सुनील कोहाड़


नारनौंद हल्के से जजपा विधायक रामकुमार गौतम ( narnaund assembly jjp MLA Ramkumar Gautam ) का एक बार फिर से मंत्री नहीं बनाए जाने का दर्द छलक पड़ा है। 2019 के विधानसभा चुनाव से ठीक बाद रामकुमार गौतम विधानसभा चुनाव के बाद से ही डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ( deputy CM Dushyant Chautala ) से खफा चल रहे हैं और समस समय पर मंत्री नहीं बनाए जाने पर अपना दुखड़ा रोते रहते हैं। रामकुमार गौतम की पार्टी आलाकमान से असंतुष्टि के कारण नारनौंद हल्का विकास के मामले में लगातार पिछड़ता जा रहा है। शायद उन्हें हल्के के विकास की तो कोई प्रवाह है नहीं और पिछले चार साल से एक ही राग अलाप रहे हैं। 






रामकुमार गौतम ने कहा था कि एक चक्रव्यूह था कि इसको टिकट दे दो, कई सीटों पर रामड़़ मार देंगे।‌ क्योंकि रामकुमार गौतम के जजपा की टिकट पर चुनाव लड़ने से ब्राह्मण वोटर पर जजपा का कब्जा हो जाएगा। गौतम ने कहा कि खुद तो डिप्टी सीएम बन गया और रामकुमार गौतम न्यू का न्यू रह गया। 77 साल का बुढ़ा हो गया हूं। बिना कर्जा उतारे मरूंगा। जो मैं कर सकता हूं, कर रहा हूं, परंतु बहुत कम कर सकता हूं, इसलिए कुछ नहीं कर सकता। वह 77 साल की उम्र में ऐसे ही मरेगा। 






डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने अपनी ही पार्टी के असंतुष्ट विधायक रामकुमार गौतम पर तंज कसा है। दुष्यंत ने कहा कि उन्हें मैंने विधायक बनवा दिया। वे उसी दिन से नाराज हैं कि उन्हें विधायक से कुछ बड़ा चाहिए। वे उम्र में मेरे से बहुत बड़े हैं और उनकी ये नाराजगी भी मुझे  सिख देती रही है। दुष्यंत का इशारा रामकुमार गौतम के मंत्री बनने की इच्छा की तरफ था।




गौरतलब है कि जब डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने नारनौंद में रैली की थी तो स्थानीय जजपा विधायक रामकुमार गौतम सर्वोत्तम इसमें शामिल होने के लिए नहीं आए थे। जिसके कारण के कार्यकर्ताओं ने भी इस रैली से दूरी बनाए रखी थी।‌‌  गौतम अक्सर बोलते हैं कि दुष्यंत चौटाला ने उन्हें टिकट देकर ब्राह्मणों के वोटों को हथिया लिया है। लेकिन वह भूल जाते हैं कि अधिकतर जाट समुदाय के लोग रामकुमार गौतम से खफा हैं और वो किसी भी सूरत में गौतम को वोट नहीं देते लेकिन जजपा द्वारा टिकट देने पर जाटों के अधिकतम वोट रामकुमार गौतम को मिले थे। जिससे वह विधायक बन पाए और भाजपा के कद्दावर नेता कैप्टन अभिमन्यु को हार का सामना करना पड़ा था।






आपको बता दें कि जब 2014 में चुनाव में कैप्टन अभिमन्यु नारनौंद हल्के से पहली बार विधायक बने थे तो तो सरकार में वित्त मंत्री के पद पर विराजमान हुए थे। कैप्टन अभिमन्यु ने हल्के में रिकॉर्ड तोड़ विकास कार्य करवाएं और दशकों से विकास के मामले में पिछड़े हुए हल्के को विकास के मामले में अग्रणी पंक्ति में लाकर खड़ा कर दिया था। लेकिन यह हल्के की बदकिस्मती थी कि इतना विकास होने के बावजूद भी हलके के लोगों ने उनको हराने का काम किया था। ‌अब लोग दुखी मन से कह रहे हैं कि काश वह यह गलती नहीं करते तो हल्का आज विकास की बुलंदियों को छू रहा होता।

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