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बेरोजगारी के चलते युवा सेंसिटिव एवं आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे - बलराज कूंडू

पवन सुसाइड मामला : इस जन्म में तो फौजी नहीं बन पाया अगले जन्म में फौजी बन पिता के सपने को पूरा करूंगा, पर भावुक हुए कूंडू !




रोहतक: सुनील कोहाड़  तहसलका न्यूज



आज युवा वर्ग बेरोजगारी की मार झेल रहा है, जिसके कारण वो रास्ता भटक गया है और गलत दिषा में कदम बढ़ा रहा है। लेकिन सरकार युवाओं के हितों पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। जिसके कारण युवा हताष होकर आत्महत्या जैसे कदम उठा रहे हैं। उक्त बातें महम से निर्दलीय विधायक बलराज कूंडू ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भिवानी जिले के गांव तालू के पवन जिस मैदान में फौजी बनने के लिए अभ्यास कर पिता के सपने को पूरा करने के लिए पसीना बहाता था, उसने उसी मैदान में फंदा लगाकर जान दे दी। इस दौरान विधायक कूंडू भावुक हो गए। 











उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बेरोजगारी के चलते युवा रास्ता भटक रहा है, लेकिन दर दर की ठोकरें खाने के बाद भी उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। प्रदेष में एनसीआरबी के आकड़ों के अनुसार 2020 में चार हजार से ज्यादा युवाओं ने आत्महत्या कर ली थी। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि वो सरकारी विभागों में रिक्त पड़े पदों को तुरंत भरकर युवाओं को रोजगार देने का काम करें। 









विधायक बलराज कूंडू ने भिवानी जिले के गांव तालू के पवन द्वारा सुसाइड करने पर बोलते हुए कहा कि ये हमारा दुर्भाग्य है कि पवन ने जिस मैदान में फौज में भर्ती होने के लिए पसीना बहाया था, आज उसने उसी मैदान में फंदा लगाकर आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया। लेकिन पवन द्वारा लिखी गई बातों ने सबको झंझोर कर रख दिया है। क्योंकि पवन ने मैदान की मिट्टी में ही लिखा था कि मैं इस जन्म में तो फौजी नहीं बन पाया, लेकिन अगले जन्म हुआ तो अपने पिता के सपने को जरूर पूरा करूंगा। 










ज्ञात रहे कि गांव तालू के पवन पंद्याल व उसके पिता ने फौज में भर्ती होने का सपना संजोया हुआ था। इसके लिए पवन ने दिन रात कड़ी मेहनत कर फौजी बनने की तैयारी की थी। कोरोना काल से पहले उसने तीन भर्तियां भी देखी और फिजीकल से लेकर मैडिकल तक पहुंचा, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और उसका चयन नहीं हो सका। लेकिन कोरोना काल के बाद फौजी की ही नहीं अन्य भर्तियां भी नहीं हुई। जिसके कारण उसकी आयु 23 सााल हो गई और उन बाप बेटों का सपना चकनाचूर हो गया। इस बेरोजगारी से तंग आकर पवन खेल के मैदान में एक पेड़ पर फांसी के फंदे पर लटक गया और उसने अपने प्राण त्याग दिए। पवन ने मरने से पहले मैदान की मिट्टी पर लिखा कि इस जन्म में तो फौज में भर्ती नहीं हो पाया, लेकिन अगला जन्म हुआ तो फौजी बनकर अपने पिता के सपने को जरूर पूरा करूंगा।

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