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डेरा प्रमुख राम रहीम ने सुनारिया जेल से लिखी चिट्ठी में डेरे की गद्दी पर बैठाने को लेकर कह दी बड़ी बात ; इन लोगों के लिए मसिहा बनेंगे डेरा श्रृद्धालु !

  ‌‌‌‌‌‌‌‌डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस पर राम रहीम ने जेल से मानवता भलाई के न‌ए‌ कार्य का किया शुभारंभ

    डेरा प्रमुख राम रहीम सिंह ( फाईल फोटो ) ।



रोहतक / सिरसा : सुनील कोहाड़ / तहलका न्यूज




   डेरा सच्चा सौदा सिरसा के 74 वें स्थापना दिवस एवं जाम-ए-इन्सां दिवस पर‌ नामचर्चा का आयोजन किया गया। जिसमें दूर दराज से साध संगत ने हिस्सा लिया।  डेरे की संगत ने अनेक मानवता भलाई के कार्य करते हुए  मनाया।‌ नामचर्चा के दौरान रोहतक की सुनारिया जेल से डेरा सच्चा सौदा प्रमुख ‌संत गुरमीत राम रहीम सिंह इन्सां द्वारा लिखी गई चिट्ठी को पढ़कर सुनाया गया।  जिसमें डेरे की गुरु गद्दी पर किसी को बैठाने व डेरे के द्वारा किए जा रहे मानवता भलाई के कार्यों की लिस्ट में नया काम शुरू किया गया। जिसको डेरा अनुयायियों ने डेरे का इलाही नारा लगाया गया। 









डेरा सच्चा सौदा सिरसा में 74 वां स्थापना दिवस बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया। डेरा प्रमुख राम रहीम ने रोहतक जिले की सुनारिया जेल से चिट्ठी लिखकर डेरा श्रृद्धालुओं को संदेश दिया कि आपने किसी के बहकावे में नहीं आना है। उन्होंने चिट्ठी में साफ कहा कि परम पिता परमात्मा ने उन्हें गुरु बनाया था, वो ही गुरु थे हैं और रहेंगे। राम रहीम की डेरे के स्थापना दिवस पर भेजी गई चिट्ठी के बाद उन बातों पर विराम लग गया। जिनमें कयास लगाए जा रहे थे कि डेरे के स्थापना दिवस पर राम रहीम की मुंह बोली बेटी हनीप्रीत डेरे की गुरु गद्दी पर बैठेगी। हालांकि इससे पहले भी हनीप्रीत ट्वीट कर सबको बता चुकी है कि पापा ही गुरु थे हैं और वही रहेंगे। 






मानवता भलाई के कार्यों में जोड़ा नया काम

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की शिक्षा पर अमल करते हुए उनके श्रृद्धालु सैकड़ों मानवता भलाई के कार्य कर रहे हैं। जैसे मरणोपरांत आंखें दान, शरीर दान, खून दान, दहेज ना लेने और ना देने, सफाई अभियान, स्वास्थ्य जांच शिविर, रिश्वत ना लेने और ना देने,‌गरीब व‌ असहाय बच्चों को शिक्षित करने, गरीब लोगों को राशन देना, मकान बनाकर देना, गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए पानी व दाने का प्रबंध करने सहित 138 मानवता भलाई के कार्य किए जा रहे हैं। रोहतक की सुनारिया जेल से डेरा प्रमुख राम रहीम द्वारा लिखी चिट्ठी में कहा गया है कि बेसहारा वह जरुरत मंद बुजुर्गों की भी सेवा व संभाल करने का प्रण लिया जाए। 










ज्ञात रहे कि सोशल मीडिया पर काफी बार देखने में आता है कि कुछ महिलाएं अपने बुजुर्ग सास ससुर पर अत्याचार की सारी हदें पार करते हुए उनके साथ मारपीट करती हैं और घरों से बाहर निकाल देती हैं। ऐसे बेसहारा लोगों के लिए डेरा सच्चा सौदा के सेवादार मसिहा बनेंगे। क्योंकि डेरा सच्चा सौदा में एक बार जो प्रण ले लिया जाता है तो उसे पूरा करके ही दम लिया जाता है।








गौरतलब है कि डेरा सच्चा सौदा सिरसा की नींव 29 अप्रैल 1948 में डेरे के संस्थापक सांई शाह मस्ताना महाराज ने सिरसा के बेगू रोड़ पर रखी थी। उसके बाद डेरा सच्चा सौदा रुपी पौधा बढ़ता गया और शाह मस्ताना महाराज ने सन् 1960 में शाह सतनाम सिंह डेरे की गुरु गद्दी पर बैठाया और उन्होंने 30 साल से अधिक समय तक राम नाम का डंका बजाया। उसके बाद राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के गांव गुरुसर मोडिया में नंबरदार सरदार मग्घर सिंह के घर जन्मे उनके इकलौते पुत्र गुरमीत सिंह को 23 सितंबर 1990 को संत गुरमीत राम रहीम सिंह बनाकर डेरे की बागडोर संभालवा दी थी। इस अवसर पर डेरे को बहुत ही सुन्दर ढंग से सजाया गया था।

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