किसान आंदोलन- किसानों का मुड भांप नहीं पा रही सरकार, अगर मांगें नहीं मानी तो सरकार को होगा नुकसान!
किसान आंदोलन- किसानों का मुड भांप नहीं पा रही सरकार, अगर मांगें नहीं मानी तो सरकार को होगा नुकसान!
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सिंधु बार्डर - तहलका न्यूज
कृषि कानून निरस्त करने पर भी किसानों और सरकार में बात नहीं बन रही। किसानों में तकरार के बाद भी किसान एम एस पी सहित अन्य मांगों को लेकर एकजुट होकर लड़ाई लड़ रहे हैं।
तीनों कृषि कानून निरस्त करने के बाद पंजाब के किसान आंदोलन खत्म कर घर वापसी चाहते हैं। क्योंकि पंजाब सरकार ने पंजाब में दर्ज मामले निरस्त कर आंदोलन में जान गंवाने वाले किसानों को मुआवजा भी देने का ऐलान पहले ही कर दिया है। लेकिन भाजपा शासित राज्यों में हरियाणा, यूपी और दिल्ली में दर्ज किए गए मामले निरस्त करने पर भाजपा सरकार कोई फैसला नहीं ले रही है। वहीं किसान शीतकालीन सत्र में ही एम एस पी पर कानून बनाए जाने पर जोर दे रहे हैं कि यूपी सहित देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा किसी भी प्रकार का नुक़सान नहीं उठाना चाहेगी।क्योंकि इन चुनाव को भाजपा ही नहीं अन्य पार्टियां भी लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल मुकाबला मान रहे हैं और इन चुनाव परिणामों पर किसान आंदोलन गहरा प्रभाव डाल सकता है।
अगर किसान आंदोलन का जल्द ही हल नहीं निकाला गया तो भाजपा सरकार को आने वाले समय में इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में एक साल पहले सख्त रुख अपनाने वाले नेता चुनावी नतीजों को भांपने लगे हैं कि कहीं उसकी छोटी सी गलती पार्टी को ना भुगतनी पड़ जाए।
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किसान नेता रवि आजाद ने बताया कि किसानों में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है। एम एस पी पर कानून बनाने, किसानों पर दर्ज मामले निरस्त करने और आंदोलन में शहादत देने वाले किसानों के परिजनों व स्मारक बनाने की मांग को लेकर सभी किसान नेता एक जुट होकर ये लड़ाई जीत कर ही घर वापसी करेंगे।


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