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जींद चीनी मिल पर किसानों ने जड़ा ताला, गेट पर धरने पर बैठे !

 


तहलका न्यूज / जींद


पिछले काफी समय से किसान गन्ने के रेट में बढ़ोत्तरी की मांग कर रहे हैं। लेकिन अब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया है जिससे गुस्साए किसानों ने भारतीय किसान यूनियन और अन्य संगठनों के साथ मिलकर जिनके सरकारी चीनी मिल के गेट पर ताला जड़ दिया और गेट के बारे धरने पर बैठ गए। 





किसानों ने कहा कि खेती लगातार घाटे का सौदा बनती जा रही है। अब खेती पर लागत कई गुना बढ़ गई है । जबकि आमदन लगातार घटती जा रही है। इस महंगाई के दौर में घर का खर्च चलाना बड़ा ही मुश्किल हो रहा है। इसलिए वो पिछले काफी समय से गन्ने की रेट में बढ़ोतरी करके 450 रुपए करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर रही है। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक गेट पर लगा ताला नहीं खोला जाएगा और उनका धरना निरंतर जारी रहेगा। हरियाणा में गन्ने का रेट 362 रुपये तो पंजाब में 380 रुपये प्रति क्विंटल है। किसानों ने कहा कि हरियाणा का रेट पूरे देश में सबसे अधिक होता था, लेकिन भाजपा सरकार ने कीमत में कोई बढ़ोतरी नहीं की। 






भाकियू के जिला प्रेस प्रवक्ता रामराजी ढुल, किसान नेता पप्पू कंडेला, थांबू बराड़ खेड़ा, रामफल राजपुरा भैण, सुभाष, भाल सिंह, अजमेर, सतीश भैण ने कहा कि सरकार किसानों के साथ ज्यादती कर रही है। एक तरफ सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने के दावे कर रही है तो दूसरी तरह गन्ने का दाम नहीं बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक गन्ने का रेट 450 रुपये प्रति क्विंटल नहीं किया जाएगा तब तक वह मिल का ताला नहीं खोलेंगे।






गौरतलब है कि सन 2012 में भी किसानों ने गन्ने की रेट में बढ़ोतरी की मांग को लेकर जींद चीनी मिल पर ताला जड़ दिया था। सात दिन तक धरना देने के बाद सरकार ने गन्ने के रेट में ₹35 की बढ़ोतरी की जिसके बाद मिल दोबारा से शुरू हो पाया था। 





डीएसपी रवि खुंडिया ने कहा कि दिनभर किसानों को समझाने का प्रयास किया गया लेकिन वे नहीं माने। यदि कोई गन्ने की ट्रॉली किसान लेकर आएंगे तो उन्हें नहीं रोकने दिया जाएगा। यदि किसानों ने गन्ने को ले जाने से रोका तो उनके साथ सख्ती से निपटा जाएगा। फिलहाल आठ बजे के बाद कोई भी किसान गन्ना लेकर नहीं आया।




जींद चीनी मिल के प्रबंधक प्रवीण कुमार ने बताया कि इसमें मिल के अंदर 10000 क्विंटल के करीब गन्ना है। जिसे मिल बड़ी मुश्किल से सुबह तक ही चल पाएगा। धरने पर बैठे किसानों ने गन्ना लेकर आने वाले किसी भी किसान को नहीं रोका है।  किसानों से बातचीत चल रही है। किसानों ने जो ज्ञापन दिया था उसको सरकार के पास भेज दिया है। ‌ अगर गन्ना में आने के कारण मेरे को बंद करना पड़ा तो दोबारा से चालू करने में काफी खर्च उठाना पड़ेगा अगर खाली मिल चलाएगा तो इसका खर्च भी हर रोज लाखों में आएगा।






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