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चक्की के दो पाटों के बीच पिसती नजर आई जनता

  Hisar ki taaja khabar : public was seen grinding between the two sides of the mill

 पुलिस की नाकेबंदी से 6 घंटे परेशान रहा आमजन 


■ एम्बुलेंस व स्कूल बसों को भी नहीं जाने दिया



तहलका न्यूज हिसार / संदीप सिंहमार । तीन कृषि कानूनों के खिलाफ देश की राजधानी दिल्ली में चले किसान आंदोलन के दौरान 26 जनवरी 2021 को किसानों द्वारा की गई ट्रैक्टर परेड से सहमें हिसार जिला प्रशासन ने मुआवजा व बीमा क्लेम राशि की मांग को लेकर ट्रैक्टर ट्राली सहित लघु सचिवालय पहुंचने की चेतावनी पर हिसार पुलिस प्रशासन ने पूरे हिसार शहर की नाकेबंदी कर सील कर दिया। 







आमतौर पर आंदोलनकारी रास्ते जाम करते हैं, लेकिन यहां उल्टा हुआ हिसार में पुलिस ने शहर से जुड़ने वाले सभी राष्ट्रीय राजमार्गों वी वैकल्पिक मार्गों को भी ट्रक में बड़े ट्राले लगाकर बिल्कुल बंद कर दिया। इसकी भनक लगते ही लघु सचिवालय के समक्ष एकत्रित हुए किसानों ने भी राजगढ़ रोड पर जाम लगा दिया।







 पुलिस व किसानों की जिद्द में बेकसूर जनता चक्की के दो पाटों की बीच पिसती नजर आई। 35.8 डिग्री सेल्सियस व तेज धूप में जनता परेशान नजर आई। जिस वक्त पुलिस ने शहर के चारों और नाकेबंदी की उसके एक घंटे बाद ही स्कूलों की छुट्टी का टाइम भी होने लगा । देखते ही देखते शहर में स्कूल बसों की भीड़ नजर आने लगी। लेकिन पुलिस कर्मियों ने न तो किसी भी स्कूल बस को जाने दिया और उन्हें ही एंबुलेंस को ।




जनता बंधक बन गई, स्टेट्स लगाने पर बायोलॉजिस्ट को नोटिस

किसानों के इस प्रदर्शन के दौरान महाराजा अग्रसेन नागरिक अस्पताल के मलेरिया विभाग के बायोलॉजिस्ट रमेश पूनिया को 'जनता बंधक बन गई है, लोग आपस में कनेक्ट नहीं हो पा रहे' यह बात अपने स्टेटस पर लगानी भी महंगी पड़ गई। बायोलॉजिस्ट के इस व्हाट्सएप स्टेटस पर उपायुक्त उत्तम सिंह ने सीएमओ से इस पर संज्ञान लेने के आदेश दिए। इसके बाद सीएमओ ने बायोलॉजिस्ट को नोटिस जारी करते हुए एक दिन में अपना स्पष्टीकरण देने के लिए कहा। सीएमओ द्वारा जारी किए गए नोटिस में लिखा गया है कि आपके द्वारा सोशल मीडिया व्हाट्सएप पर आपत्तिजनक स्टेटस लगाया गया। इस बारे में आप अपना स्पष्टीकरण 11 अगस्त को देना सुनिश्चित करें। अन्यथा आपके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 





इस संबंध में बायोलॉजिस्ट रमेश पूनिया को दोपहर बाद सीएमओ ने अपने कार्यालय में भी बुलाया उन्हें सुझाव दिया गया कि वह इस पर खेद जताएं, लेकिन डॉक्टर रमेश पूनिया ने मना कर दिया। उन्होंने कहा कि मैंने किसी पर कोई कमेंट नहीं किया और न ही किसी संगठन का समर्थन किया। मैं खुद जाम में फंसा हुआ था। इसलिए मैंने आम पब्लिक की समस्या का जिक्र किया। पब्लिक दुखी थी। रास्ते बंद हो गए थे।





डिवाइडर को पार कर एंबुलेंस निकालनी पड़ी


एंबुलेंस को देखकर किसानों ने तो रास्ता खोल दिया लेकिन पुलिस को एंबुलेंस में मौजूद मरीज पर भी कोई रहम नहीं आया । आखिर एंबुलेंस चालक ने सड़क के बीचो-बीच बने डिवाइडर को पार कर एंबुलेंस निकाली। खास बात यह है कि यदि किसी भी एपीडीए स्थिति में जब जिलाधीश को कर्फ्यू लगाना पड़ जाए तो उससे पहले भी अनाउंसमेंट की जाती है लेकिन वीरवार को पुलिस की नाकेबंदी के दौरान किसी भी प्रकार की कोई सूचना नहीं दी गई अपने गंतव्य की ओर जाने के लिए आम जनता 6 घंटे तक शहर में भटकती रही। भारत से हिसार की ओर आने वाले किसी भी व्यक्ति को सड़क के बीचो बीच ट्रक वाले देखकर समझ नहीं आ रहा था कि आखिर यह मामला क्या है ? कोई इसे नूंह घटना से जोड़कर देख रहा था, तो कोई पुलिस कर्मियों से पूछताछ करता नजर आया।

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