निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने बिजली खरीदने का सुरजेवाला ने लगाया आरोप !
निजी कंपनियों से सरकार की सांठगांठ : सुरजेवाला
रणदीप सिंह सुरजेवाला। फाईल फोटो।चंडीगढ़ : सुनील कोहाड़ / तहलका न्यूज
प्रदेश की गठबंधन सरकार और निजी कंपनियों की सांठगांठ की मार प्रदेश की जनता झेल रही है और इसका असर आम आदमी के साथ साथ प्रदेश के खजाने पर भी पड़ रहा है। भीषण गर्मी में भी लोगों को बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। उक्त शब्द कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने चंडीगढ़ स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहे।
उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने से गर्मी सितम ढा रही है और शहर से लेकर गांव तक लोग बिजली कटौती का सामना कर रहे हैं। आए दिन मुख्यमंत्री व मंत्री ब्यान दे रहे हैं कि अब बिजली कट नहीं लगेंगे। लेकिन कोई सुधार नहीं हो रहा, बल्कि दिन प्रतिदिन बिजली संकट गहराता जा रहा है। प्रदेश के थर्मल पावर प्लांट में आई खराबी को ठीक करवाने की बजाय निजी कंपनियों से महंगें दामों पर बिजली खरीदने की साजिश रची जा रही है। ताकि उन्हें फायदा पहुंचाया जा सके।
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि निजी बिजली वितरण कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए ही प्रदेश में बिजली संकट पैदा किया गया है। ताकि निजी कंपनियों की मनमानी के रेट प्रदेश की जनता पर थौंपे जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार के खजाने पर पड़ने वाले सालाना 51,282 करोड़ का भार इसके लिए जिम्मेवार कौन है? इस प्रश्न का सरकार जवाब दे। भीषण बिजली कटौती के दौर में लोग असहनीय गर्मी और बिजली संकट झेलने को मजबूर हैं, दस से बारह घंटे तक की बिजली कटौती ने जीवन दुश्वार कर दिया है। खेती सूखे की कगार पर है औऱ प्रदेश के अंबाला, यमुनानगर, कुंडली, फरीदाबाद, गुड़गांव, मानेसर बिजली उत्पादन उद्योग ठप पड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि मई महीने में प्रदेश में 9500 मेगावॉट बिजली की आवश्यकता होगी। जोकि जुलाई से सितंबर तक हर महीने बिजली की मांग बढ़कर लगभग 12 हजार मेगावॉट हो जाएगी। मांग के मुकाबले में जून से सितंबर तक हर महीने 3 हजार मेगावाट से 4 हजार मेगावॉट बिजली की कम आपूर्ति हो पाएगी।
रणदीप सिंह सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि अडानी पॉवर, मुंद्रा, गुजरात से मिलने वाली 1424 मेगावॉट बिजली का 1 यूनिट भी नहीं मिलना और प्रदेश सरकार की विफलता के चलते खुद के बिजली घरों में उत्पादन नहीं हो पाना इसके बड़े व मुख्य कारण हैं। सरकार की प्राईवेट बिजली उत्पादकों से मिलीभगत कर रही है, यह बात पूरी तरह से साफ है। हरियाणा के लोगों पर दोहरी मार पड़ रही है। पहला, हरियाणा को सस्ते रेट पर मिलने वाली कॉन्ट्रैक्टेड बिजली सप्लाई नहीं मिल रही। दूसरा बिजली की कम आपूर्ति को पूरा करने के लिए हरियाणा को दोगुने रेट पर बिजली खरीदनी पड़ रही है। जिससे सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है।

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