नरकीय जीवन जीने को मजबूर बास गांव के ग्रामीण, अस्पताल तक का रास्ता साफ नहीं, पानी की निकासी बनी सरकार के गले की फांस !
Drainage of water became a noose around the government's neck
नारनौंद : सुनील कोहाड़ / तहलका न्यूज
गांव बास में मुख्य गली का बुरा हाल है गली में पानी इस कदर भरा रहता है कि आने जाने वाले राहगीरों और छात्रों को पानी में से ही गुजारना पड़ता है। इसको लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन के अधिकारियों से काफी बार शिकायत कर चुके हैं और इसकी सीएम विंडो भी लगा चुके हैं लेकिन आज तक भी समाधान नहीं हो पाया।
गली का पानी निकासी सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों के लिए गले की फांस बनी हुई है। लंबे समय से पानी निकासी के लिए ग्रामीण संजय सहित सैकड़ों ग्रामीण प्रशासन व सरकार से गुहार लगा रहे हैं। लेकिन बार-बार आश्वासन मिल रहे हैं। यह गांव का मुख्य रास्ता है। इसको लेकर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम पानी निकासी के लिए सीएम विंडो लगाई और डीसी उत्तम सिंह को ज्ञापन सौंपा। जिससे ग्रामीण पीएचसी हॉस्पिटल में दवाई लेने, छात्र, ग्रामीण पीएनबी बैंक में पैसों का लेनदेन के लिए और मिनी बैंक में खाद बीज लेने के लिए ग्रामीणों को पानी से होकर गुजरना पड़ता है।
जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल, उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला, जर्नल डीपी वत्स, विधायक राम कुमार गौतम, डीसी उत्तम सिंह, एडीसी, कमिश्नर, बीडीपीओ हांसी, एसडीएम विकास यादव सहित चारों पंचायत के सरपंच के पास पानी निकालने की गुहार लगा चुके हैं। लेकिन आज तक पानी की निकासी की समस्या का समाधान नहीं करवा सके। ग्रामीण व नव युवा जागृति मंच के युवा टीम सीएम हाउस पानी निकासी के लिए काफी चक्कर काट चुकी है। इस पानी निकासी का रास्ता पीएचसी हॉस्पिटल से बाबा का मंदिर से जलघर के साथ खरबला रोड स्थित ड्रेन व खुर्द तालाब से बड़ाला रोड स्थित ड्रेन में दो बार पाइपलाइन का अस्टीमेट व टेंडर हुआ लेकिन प्रशासनिक व ठेकेदार की गलती से काम शुरू नहीं हुआ। दो बार सीएम विंडो लग चुकी है। इससे ग्रामीणों में भारी रोष है पानी निकासी नहीं हुई तो ग्रामीण रोड जाम करने पर मजबूर होंगे

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