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बीरेंद्र सिंह ने भाजपा को फिर दिखाएं बागी तेवर

 किसानों मजदूरों के हकों की बात करना पाप है तो बेसक पार्टी मुझे निकाल दें - पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह




उचाना - तहलका न्यूज

किसानों मजदूरों के हकों की बात करना पाप है तो वो ये आवाज उठाते रहेंगे। इसके लिए चाहे मुझे पार्टी से ही निकाल दें।‌ जिस समय भाजपा में शामिल हुआ था उससे भी बड़ी रैली करूंगा। उक्त शब्द पूर्व केन्द्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह ने उचाना के राजीव गांधी कालेज में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहे।‌ उन्होंने कहा कि मैंने राजनीति से संन्यास नहीं लिया है। बल्कि चुनावी राजनीति से संन्यास लिया है। वो राजनीति करते रहेंगे।



उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में उन्होंने सरकार से किसानों की बात मानकर कृषि कानून निरस्त करने की बात की थी। लेकिन सरकार उस समय नहीं मानी और किसानों के एक साल तक आंदोलन जारी रखने पर वापिस लिए। मैं शुरू से ही कहता था कि किसानों से बातचीत कर उनकी मांगों को पूरा करें। क्योंकि किसानों को एम एस पी खत्म होने का डर नहीं सत्ता रहा था। बल्कि कृषि कानूनों के कारण जमीन खोने का डर था।



पूर्व केंद्रीय मंंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा कि वे कांग्रेस छोड़कर जब भाजपा में शामिल हुए थे। उस समय लाखों लोग जुटाकर रैली की थी। अगले साल 26 जनवरी को बड़ी रैली करेंगे। यह रैली भाजपा में जब वो शामिल हुआ था था, उससे बढ़ी रैली होगी। उनके जन्मदिन पर 25 मार्च को उचाना में सम्मेलन करेंगे। इसमें उनके हरियाणा के राजनीति जो साथी है इसमें वो भी शामिल होंगे।



 उन्होंने कहा कि राजनीति फैसले कभी दिल से नहीं दिमाग से लिए जाते हैं। जो भी राजनीति फैसला होगा वो मेरे पर छोड़ दो। जो भी फैसले करूंगा वो खुद हित के लिए नहीं बल्कि आप लोगों के हितों के लिए करूंगा। जब मैं कांग्रेस में था जब भ्रष्टाचार की बात आती थी तो मैं उस समय भी कहने से पीछे नहीं हटा था। लोगों के हितों की बात होती थी तो वो कहने से पीछे नहीं हटे थे। किसान की बात वो हमेशा करेंगे। अगर किसान की बात करना पाप है तो बेशक उन्हें पार्टी से निकाल दे वो किसान, मजदूरों के हितों की बात करने से पीछे नहीं हट सकते।



उन्होंने कहा कि शिक्षा होगी तो ही क्षेत्र मजबूत होता है। हमारे क्षेत्र में शिक्षा का अभाव रहा है। यहां पर उच्च शिक्षा होनी चाहिए। हरियाणा में आज भी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है।  ग्रामीण क्षेत्र में अगर कोई बीमार हो जाए तो दवा जल्दी से नहीं मिलती, पढ़ाई जो होनी चाहिए वो नहीं हो रही है। क्योंकि जहां बच्चे पढ़ने वाले होते है वहां अध्यापक नहीं, जहां अध्यापक है वहां बच्चे नहीं। जहां दोनों है वहां किताबें नहीं। ये जो कमी है उनको दूर करना होगा। अपने जीवन में हमेशा साफ छवि, ईमानदारी की राजनीति की है।



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