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भिवानी खनन मामला, राहत कार्य में ये बनी बाधा

 मशीनों के अस्थी पिंजरों को देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों का क्या हुआ होगा


खानक में दूसरे दिन भी जारी रहा राहत बचाव कार्य, अब तक पांच के शव बरामद, कई लापता


भिवानी - तहलका न्यूज

      भिवानी जिले के तोशाम के पास खानक में पहाड़ धंसने से खनन में काम कर रहे लोगों सहित दर्जनों मशीनों सहित ट्रक डंफर भी बड़े-बड़े पत्थरों के नीचे दब गए थे। हादसे को हुए 40 घंटे से ज्यादा समय बीत चुका है और एनडीआरएफ सहित मिल्ट्री की टुकड़ियां राहत कार्य में लगी हुई हैं। परंतु इतने बड़े बड़े पत्थरों को हटाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 



    तोशाम खानक के डाडम जोन में शनिवार सुबह पहाड़ गरकने से वहां पर काम कर रहे लोगों सहित मशीनें व अन्य साधन पहाड़ के नीचे दब गए थे। राहत कार्य में मिल्ट्री हिसार से उसी समय रवाना हो गई थी और रविवार दोपहर को एनडीआरएफ की टीम भी राहत कार्य में जुट गई। दूसरे दिन बचाव दल को कोई खास कामयाबी हासिल नहीं हुई। क्योंकि पहाड़ का बहुत बड़ा हिस्सा गिरा होने के कारण मशीनों से भी हटाने में दिक्कत आ रही हैं। 


वहीं राहत कार्य के दौरान नीचे दबी मशीनों के पुर्जो को देख अंदाजा ही लगाया जा सकता है कि नीचे दबे हुए लोगों का क्या हाल मिलेगा। इस हादसे की सुनते ही लोगों की रुह कांप जाती है और जो लोग इस हादसे का शिकार हुए हैं उनके परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है। 



अब तक पांच शव बरामद हो चुके हैंं। जिनमें शनिवार को ही चार शव देर सांय तक निकाले जा चुके थे और रविवार को केवल एक को ही निकाला जा सका। इसी से सोचा जा सकता है कि खनन से मलवा हटाने में कितनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं जिन लोगों के शव अभी तक बरामदे नहीं हुए हैं उनके परिजनों व रिस्तेदारो का जमावड़ा भी खनन के आसपास लगा हुआ है कि कहीं से कोई राहत भरी खबर ही सुनने को मिल जाए। 


ठेकेदार वेदपाल तंवर ने बताया कि खनन क्षेत्र दोनों तरफ से फोरेस्ट एरिया से घिरा हुआ है. फोरेस्ट एरिया क्षेत्र से हजारों टन का पहाड़ दरकर खनन क्षेत्र की तरफ आया, जिससे यह हादसा हुआ है।



ग्रामीण भी करना चाहते हैं राहत कार्य में मदद

  इस हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के गांव के ग्रामीण डाडम जोन खनन पहुंचे कि राहत कार्य में मदद करेंगे। लेकिन एंट्री गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया। क्योंकि इतने बड़े बड़े पत्थरों को मशीनों से ही नहीं हटाया जा रहा तो इंसानों के कहां बस की बात है।


क्या कहते हैं पुलिस अधीक्षक

भिवानी एसपी अजीत सिंह शेखावत ने बताया कि जिला प्रशासन की पूरी टीम बाहर से आई हुई टीमों के साथ मिलकर राहत कार्य में लगी हुई है. युद्धस्तर पर राहत कार्य जारी है और कार्य को पूरा होने में अभी 24 घंटे का समय और लग सकता है. अजीत सिंह ने बताया कि पूरे ऑपरेशन को कंप्लीट करने में हमारी टीमें लगातार लगी हुई हैं।


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एनडीआरएफ गाजियाबाद के टीम रातभर बचाव कार्य में जुटी रही और यह बचाव कार्य रविवार को भी चलता रहा। शनिवार की रात करीब दो बजे एनडीआरएफ की डॉग स्कायड में शामिल रोडरीक डॉग ने शव एक पत्थर के नीचे दबा होने के संकेत दिए तो बचाव दल ने तुरंत प्रभाव से दिनेश के शव को बाहर निकाला। अब तक हादसे में दिनेशदत्त सहित चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जिसमें दिनेशदत्त के अलावा बिजेंद्र बागनवाला, तूफान बिहार व संजय जींद शामिल हैं। बचाव कार्य में रोडरीक के अलावा जर्मन शेफर्ड टेस्टमनी भी टीम में शामिल है। 



 एनडीआरएफ गाजियाबाद टीम के अनुसार करीब 40 बाई 30 फीट की भारी भरकम शिला नीचे गिरी हुई है। इस चट्टान को ड्रील करने का काम किया जा रहा है। तीन चार जगह से ड्रील होने बाद ही चट्टान को ब्लास्ट किया जाएगा। पांच से दस लोगों को एक साथ बचाव के लिए भेजा जा रहा है। प्रत्येक दो-दो घंटे में शिफ्ट के साथ बचाव दल में शामिल लोगों को चेंज किया जाता है और राहत कार्य में जाने वाले लोगों का पूरा रिकार्ड रखा जाता है। बचाव कार्य के दौरान करीब छोटे-बड़े छह वाहन निकाले जा चुके हैं। 


Truck dumpers along with ozens of machines, including people working in mining, were also buried under huge stones due to a mountain collapse at Khanak near Tosham in Bhiwani district.  More than 40 hours have passed since the accident and military units including NDRF are engaged in relief work.  But there is a lot of difficulty in removing such huge stones.

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