लोहारी राघो रामलीला रावण वध के साथ संपन्न, विधायक विनोद भ्याना ने सांझा की बीती यादें, कड़कदार अंदाज में डायलोग सुनाया तो गूंज उठा पंडाल !
बतौर मुख्यातिथि पहुंचे विधायक बोले इसी पंडाल में नीचे बैठकर देखता था रामलीला
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| लोहारी राघो के श्रीरामा क्लब के सदस्य विधायक विनोद भ्याना को सम्मानित करते हुए। |
नारनौंद :
गाँव लोहारी राघो में श्रीरामा कल्ब के बैनर तले चल रही ऐतिहासिक रामलीला लक्ष्मण मूर्छा व रावण वध के मंचन के साथ संपन्न हो गई। अंतिम दिन बतौर मुख्यातिथि पधारे विधायक विनोद भ्याना ने रामलीला से जुड़ी बीती यादें सांझा की तो पंडाल तालियों व किलकारियों से गूंज उठा। करीब 28 साल बाद विधायक के मुख से रावण व अंगद के डायलोग सुनकर हर कोई बीते लम्हों में खो गया। किसी को जैसे यकिन ही नहीं हो रहा था कि आज 30 साल बाद रामलीला की स्टेज पर फिर से वे उसी पुरानी कडकदार आवाज को सुन रहे हैं। जिसने कभी लोगों के दिलों में जगह बना ली थी। इससे पूर्व विनोद भ्याना ने रिबन काटकर रामलीला का शुभारंभ किया।
श्रीरामा कल्ब के कलाकारों ने विनोद भ्याना का बुके प्रदान कर जोरदार स्वागत किया तथा उन्हें राम दरबार का स्मृति चिह्न भेंट किया। वंद प्रकाश चांदना ने स्वागत गीत के जरिए मुख्यातिथि विधायक भ्याना का स्वागत किया। मंचन के दौरान सीता की खोज करते हुए हनुमान लंका में पहुंच जाते हैं तथा सीता से मिलने के उपरांत भूख लगने पर अशोक वाटिका को उजाड़ देते हैं। मेघनाथ हनुमान जी को पकड़कर रावण के दरबार ले जाता है जहाँ उसकी पूंछ में आग लगा दी जाती है। रावण विभीषण को लंका से निकाल देता है तो विभीषण भगवान श्री राम की शरण पहुंच जाता है। तत्पश्चात अंगद को दूत बनाकर रावण को अंतिम चेतावनी देने के लिए भेजा जाता है। लेकिन रावण के न मानने पर युद्ध छिड़ जाता है। मंचन में दिखाया गया मेघनाथ के शक्ति बाण चलाने से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। यह समाचार राम दल में पहुंचते ही हाहाकार मच जाता है। राम इस मौके पर जीवंत प्रस्तुति करते हैं। अगले प्रसंग में लक्ष्मण की मूर्छा समाप्त होती है, तो पूरा वातावरण राम, लखन और हनुमान के जयकारे से गूंजने लगता है।
लीला में राम-कुंभकरण लड़ाई के दृश्य का मंचन किया जाता है। अंत में कुंभकरण मारा जाता है। इसके बाद लक्ष्मण जोरदार आवाज में मेघनाद को ललकारते हैं। दोनों में युद्ध होता है। लक्ष्मण लाल मेघनाथ का भी वध कर देते हैं। उसके बाद राम और रावण के बीच लंबा युद्ध चलता है। इसी बीच विभीषण ने बताया कि रावण की नाभि में अमृत है। उसे भेदकर ही रावण की मृत्यु हो सकती है। इसके बाद रामबाण चलाकर रावण की नाभि में पड़े अमृत को सूखा देते हैं। रावण के गिरते ही पंडाल जय श्रीराम के गगन भेदी नारों से गूंजने लगता है। दूर दराज से आए लोगों ने लीला का मंचन देख कलाकारों की जमकर सराहना की। लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध, कुंभकरण वध के बाद रावण बध तक की लीला में लोग तरह-तरह की संवेदनाओं और भावनाओं में डूबते उतराते रहे।
मंचन के दौरान श्री राम के किरदार में हर्ष भ्याना, लक्ष्मण के किरदार में साहिल अरोड़ा उर्फ टोनी, हनुमान कृष्ण भ्याना नंबरदार, सीता विजय कुमार, रावण विक्रम चावला, विभिक्षण टीटी उर्फ रामप्रकाश मलिक, सुग्रीव सुभाष चराया उर्फ सीटी ने बखूबी निभाया। इस अवसर पर लोहारी राघो के श्री रामा कल्ब के प्रधान सेवक गुलशन भ्याना, डायरेक्टर मुनीष चराया,सुभाष चावला, नंबरदार कृष्ण भ्याना, जयपाल, ईश्वर, डॉक्टर भूषण, रामप्रकाश उर्फ टीटी, कृष्ण कम्बोज, गोपी राम, इंद्रजीत तनेजा, राजकुमार सेठी, वेद प्रकाश चांदना, मास्टर सूबे सिंह, कृष्ण बडगुजर, रामगोपाल समेत गाँव के अनेक गणमान्यजन तथा भारी तादाद में श्रद्धालु मौजूद रहे।


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