कृषि कानून रद्द करने पर लगी कैबिनेट की मोहर, अब गेंद किसके हाथ में
दिल्ली - कृषि कानूनों को निरस्त करने को लेकर मोदी सरकार किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहती। जिससे उसे उतर प्रदेश सहित पांच राज्यों में नुकसान ना हो। बुधवार को कैबिनेट की बैठक में कानूनों को निरस्त करने को मंजूरी दे दी गई है। हालांकि किसान अब भी आंदोलन स्थगित करने के मूड में नहीं दिखाई दे रहा है। किसान अन्य मांगों को लेकर अब तक भी अडिग है और संसद मार्च सहित एक साल पूरा होने पर बार्डरों पर भीड़ जुटाने की तैयारी कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 19 नवंबर सुबह ही देश के नाम संबोधन में कृषि कानून निरस्त करने का ऐलान कर दिया था।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित एनडीए के तमाम नेताओं ने सोचा था कि किसान हंसते हंसते घरों को लौट जाएंगे और भाजपा का गुणगान करेंगे। लेकिन किसानों ने फैसले का स्वागत तो किया। परंतु आंदोलन स्थगित न करके जारी रखने का ऐलान कर दिया। जिसके कारण सरकार की काफी किरकरी हुई। किसानों ने अपने किसी भी कार्यक्रम में कोई बदलाव नहीं किया। प्रधानमंत्री के कानून निरस्त करने के ऐलान के तीन दिन बाद ही किसानों ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में महापंचायत कर अपनी ताकत का अहसास करवा दिया कि किसान किसी भी सुरत में अपनी मांगों को मनवाए बगैर घर नहीं जाने वाले और साफ कर दिया कि जब तक संसद में कानून निरस्त नहीं किए जाते तब तक वो यहां से नहीं हिलेंगे।
किसानों के रुख को भांपते हुए सरकार ने बुधवार को कैबिनेट मंत्रियों की बैठक बुलाई और उसमें कृषि कानूनों को रिफिल करने की मंजूरी दे दी गई। अब देखना होगा कि किसान आंदोलन स्थगित करते हैं या फिर शीतकालीन सत्र तक मोदी सरकार पर दबाव बनाए रखने का फैसला करते हैं।
किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा कि किसानों को भाजपा नेताओं की किसी बात पर भरोसा नहीं रहा। तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करवाना ही नहीं बल्कि एम एस पी पर कानून, आंदोलन के दौरान शहादत देने वाले किसानों के लिए स्मारक बनाने, किसानों पर दर्ज मामले निरस्त करने, बिजली विधेयक 2020-21 में संशोधन, पराली जलाने वाले कानून को वापिस लेना शामिल है। इन मसलों पर चर्चा होने के बाद भी भाजपा सरकार ये कानून लेकर आई। जिसके कारण किसानों व मजदूरों को भाजपा नेताओं की किसी बात पर विश्वास नहीं रहा और जब तक किसानों की मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक किसान आंदोलन स्थगित नहीं करेंगे।


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